शुक्रवार, 14 मार्च 2014

अजीब सा समय है ये........ !!!!


       बड़ा अजीब सा समय है, सब कुछ उल्टा है आजकल, खबर विज्ञापन हो गई हैं और खबरनवीस नेता हो गए हैं  l नेता कारोबार करते हैं और कारोबारी अपराधी हो गए हैं  l  अपराधी तानाशाह हो गए हैं तानाशाहों का चुनाव होने लगा है  l
     हर तरफ विडंबनाएं और त्रासदियाँ हैं। रोज ही सुनते हैं कि रुपया गिर रहा है, लेकिन अमीर के नीचे खड़े गरीबों की झोली में एक खोटा-सिक्का भी नहीं गिरा है और मुद्रा जो की है ही नही, वही bitcoin सबसे महंगी मुद्रा है  l भूमंडलीकरण हो चुका है लेकिन गांव की सब्जियां गांव में ही सड़ रही है  l किसान बैल न होने की वजह से आत्महत्या कर रहा है , लेकिन शेयर बाज़ार में ‘बुल्स‘ की भरमार है
      आजादी की अहमियत सभी मानने लगे हैं लेकिन आजादख्याल लड़की समाज के लिए खतरा है  l प्रेम दिवस विरोधी दक्षिणपंथी प्रचारक प्रेम के जुर्म में पकड़े जा रहे है और जिन महात्माओं ने ब्रह्मचर्य का पाठ पढाया, वे स्वयं बलात्कार के मामलो में आरोपी हैं  l लिंगानुपात गिर रहा है लेकिन दहेज अभी भी लड़की वाले ही देते हैं  l दलितों के हाथी ब्राह्मणों को सवारी करवा रहे हैं, लेकिन दलित घोड़ी से उतारे जा रहे हैं  l जनसाखिकीय लाभांश का समय चल रहा है लेकिन युवा बेरोजगार है। आतंकी घटनायें कम हो चुकी हैं , लेकिन महिलाओ ने घर से बाहर निकलना बंद कर दिया है।
     लोग अहिंसक धरना दे रहे हैं लेकिन संसद हिंसा के अखाड़े से कम नही है और लोकसभा चैनल देखने वाले शान से दूसरे दिन पटरी उखाड़ दे रहें हैं। कार्यपालिका में कार्य, विधायिका में विधेयक और न्यायपालिका में न्याय ही अटका पड़ा है।    
     जंगल काटने वाले टी-ब्रेक में पेड़ बचाने के नुस्खे सोच रहे हैं और बर्ड-फ्लू से बचने के चक्कर में शाकाहारी हुए लोग जैवविविधता को बचा रहे हैं। उत्तर-पूर्व में भारत को चीन से खतरा है भारत में  उ.पूर्वी भारतीयों को भारतीयों से ही खतरा है !!  पाकिस्तान के क्रिकेटरों की जिंदाबाद देशद्रोह है लेकिन सानिया मिर्ज़ा अभी भी भारत के लिए मेडल लाती हैं  
     जिस पार्टी के नाम में समाजवादी है वो समाजवादी ही नहीं है  l मजदूर पत्थर लेकिन मार्क्सवादी विचार ढोने में व्यस्त हैं और माओवादी पूंजीपतियों से चंदा लेकर सुरक्षा की गारंटी दे रहे हैं और इसी चंदे से बंदूक खरीदकर आदिवासी लडकों को मरवा रहें है  l आदिवासी क्षेत्रों में विस्थापन वाला विकास जोर-शोर से जारी है, लेकिन अखबार की तस्वीर में वे अभी भी घेरा बनाकर खुशी से नाच रहे हैं.  l ........-अरविन्द    

शनिवार, 8 मार्च 2014

सहिष्णुता का गुड गोबर

    
मेरठ में कश्मीरी छात्रों द्वारा पाकिस्तान की जीत का जश्न मनाना कितना गलत कितना सही , नही पता। लेकिन इस घटना का प्रचार खूब हुआ, मामला भी शायद प्रचार के  लिए दर्ज हुआ हो कौन जाने ? चुनाव सर पर है .. .  
जामिया हॉस्टल की यादें  ताजा हो आई, मैच के दौरान मुस्लिम छात्रों में भी दो ग्रुप बन जाते थे और एक ही टीवी हॉल में नोक-झोंक चलती रहती किन्तु ज्यादातर स्टुडेंट्स शुरू में ग्रुप्स से अलग रहते बाद में जिस टीम का पलड़ा भारी होता उसके ग्रुप में आ जाते। 
मुझे याद है, बटला हाउस में भारत के विश्व कप जीतने की खुशी मनाते समूहों से  देर रात तक गलियां रोशन थी,  लेकिन ऐसी घटनायें याद नहीं रखनी होती, बतानी नही होती , ऐसे प्रचार से सौहार्द पनप जाने का खतरा होता है ......
 अक्सर ऐसे मुद्दों पर बहुसंख्यको के मन में कई भ्रान्तियां होती है सतही तर्क होते है। कश्मीर में आतंकी घटनाओं और उनके बाद अफ्स्पा ने भय का माहौल  बना दिया।  370 के दर्जे के बाद भी केन्द्रीय कानून और संस्थाओ का फैलाव रुका नहीं ! हिंसा, अपवाद ग्रस्त न्याय, बेरोजगारी, पिछड़ापन , अव्वल दर्जे की कौशल और शिक्षण संस्थाओ का अभाव गुस्से का माहौल तो तैयार करेंगे ही!   तिस पर भी जिस देश की अखंडता के लिए आप ये सब सहते है वहाँ के हर कोने में आपको कश्मीरी ही समझा जाये , भारतीय नही . हमारे लिए कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है किन्तु कश्मीरी नहीं !!! 
ये उनका अपराध नही, निराशा , हताशा की अभिव्यक्ति है . पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाने वाले कुछ निराश भटके युवको पर संगीन मुकदमा चलाने से अलगाव ही पनपेगा न ही इससे हिंदुस्तान ज़िंदाबाद हो पायेगा।   समावेशी सहिष्णु भारतीय संस्कृति गुड़ गोबर भले हो जाये।    
 अल्पसंख्यको को भी समझना होगा पाकिस्तान जिंदाबाद बोलने से मुर्दे वापस नही आयेंगे , न रोजगार मिलेगा, किन्तु नफरत अवश्य ही बढेगी। कई पीढियों तक ऐसे तुच्छ मुद्दों में उलझे रहने से  “सच्चर-सहानुभूति“ का ही इंतजार करते रहना होगा। 


अल्प-बहू  सभी संख्यको!!  पाकिस्तान जिंदाबाद बोलने से पाकिस्तान नही जीतता है।  मैच  फिक्सिंग के कारनामे जितने सामने आ पाते है, वास्तव में  उनसे ज्यादा ही  होते है। देशद्रोह के मुकदमे चलाने ही है तो क्रिकेट मैच के जिन्दाबाद- मुर्दाबाद से ध्यान हटाओ। रक्षा खरीद में भ्रष्टाचार करने वाले ज्यादा मुकम्मल टारगेट रहेंगे !!!.