कायर भूमि में चौपाल
अभद्र अनर्थ अशिष्ट !!!!!
एक स्वर में गुर्राए, खूसट
भरी चौपाल ,
करो हलाल,
ढीले नाड़े ,
टूट पड़े ......
नोंचते रहे ,खोंसते रहे,
रह -रह खींसे निपोरते रहे
प्रेमस्वप्न , निरीह यौवन, सौम्य बालिका
क्यों बनी बिरादरी के बाहर प्रेमिका ........
अरविन्द
अभद्र अनर्थ अशिष्ट !!!!!
एक स्वर में गुर्राए, खूसट
भरी चौपाल ,
करो हलाल,
ढीले नाड़े ,
टूट पड़े ......
नोंचते रहे ,खोंसते रहे,
रह -रह खींसे निपोरते रहे
प्रेमस्वप्न , निरीह यौवन, सौम्य बालिका
क्यों बनी बिरादरी के बाहर प्रेमिका ........
अरविन्द
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