शनिवार, 25 जनवरी 2014

कायर भूमि में चौपाल

कायर भूमि में चौपाल

 अभद्र अनर्थ अशिष्ट !!!!!
एक स्वर में गुर्राए, खूसट

 भरी चौपाल , 
करो हलाल,
ढीले नाड़े ,
टूट पड़े ......

नोंचते रहे ,खोंसते रहे,
 रह -रह  खींसे निपोरते रहे 

प्रेमस्वप्न , निरीह यौवन, सौम्य बालिका 
क्यों बनी बिरादरी के बाहर प्रेमिका ........ 
                                                      अरविन्द    

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